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कानपुर में नौकरी के नाम 43 लोगों से 80-लाख ठगे:गर्वनर कोटे से चतुर्थ श्रेणी पदों पर नौकरी का दिया झांसा, कोतवाली में 3 पर FIR

📅 प्रकाशित: 23 October 2026, 04:06 👁️ 2 बार देखा गया

शिक्षा आयोग में नौकरी दिलाने के नाम पर 43 युवाओं से करीब 80 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने खुद को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज के संयुक्त सचिव से जुड़ा बताकर लोअर डिवीजन क्लर्क (एलडीसी), चपरासी और माली के पदों पर नियुक्ति कराने का झांसा दिया। पीड़ित ने पुलिस कमिश्नर से मामले की शिकायत की, जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। शिक्षा आयोग में रिश्तेदार को बताया ज्वाइंट सेक्रेटरी नेहरू नगर निवासी शरद अवस्थी के मुताबिक, वह वर्ष 2011 से नारायन सिनेमा और सत्यम सिनेमा में प्रबंधक व प्रापर्टी केयर टेकर के रूप में काम कर रहे हैं। इसी दौरान उनकी मुलाकात फजलगंज निवासी नीरज मिश्रा से हुई। आरोप है कि नीरज ने अपने ममिया ससुर अरविंद नारायन शुक्ला को माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज में ज्वाइंट सेक्रेटरी बताया। उसने अपनी चतुर्थ श्रेणी में नियुक्ति होने का दावा करते हुए राज्यपाल कोटे से सीधी भर्ती कराने की बात कही। एलडीसी और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति के लिए सात चरणों की कागजी कार्रवाई बताई गई। अभ्यर्थियों से हलफनामा, मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, शैक्षिक प्रमाणपत्र और पासपोर्ट साइज फोटो मांगे गए। नियुक्ति पत्र मिलने से पहले ढाई लाख और वेतन शुरू होने के बाद बाकी ढाई लाख रुपये देने की बात कही गई। सितंबर 2025 में पीड़ित से वसूल ढाई लाख शरद अवस्थी का आरोप है कि उनके बेटे यशवर्धन और बेटी अर्चिता को एलडीसी पद पर नियुक्ति दिलाने का झांसा देकर जुलाई से सितंबर 2025 के बीच ढाई लाख रुपये लिए गए। वहीं उनके परिचित शान अली ने अपने भतीजे मो.सोहेल की लिपिक पद पर नियुक्ति के लिए जून 2025 में दो लाख रुपये दिए। आरोप है कि ज्ञानेंद्र दुबे खुद को संयुक्त सचिव का निजी सहायक बताता था। अभ्यर्थियों को लखनऊ स्थित शिक्षा निदेशालय और प्रयागराज आयोग में बुलाकर आवेदन पर हस्ताक्षर कराए गए। पांच सितंबर 2025 को लोक भवन में मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्ति पत्र वितरित किए जाने की बात कही गई। बाद में तिथि बदलने का हवाला देकर अभ्यर्थियों को टाल दिया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस तरह करीब 43 अभ्यर्थियों से लगभग 80 लाख रुपये वसूले गए। कोतवाली प्रभारी अरुण द्विवेदी ने बताया कि पीड़ित ने पुलिस कमिश्नर के जनशिकायत प्रकोष्ठ में शिकायत की थी मामले को लेकर तीन आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्जकर जांच की जा रही है।


स्रोत: आधिकारिक समाचार माध्यम (https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/kanpur/news/kanpur-job-fraud-education-commission-police-fir-scam-139458677.html)

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