314 साल पुराने मुगलकालीन तालाब को पुनर्जीवित करेगा एमसीडी:ओखला में लुप्त ‘किशन दास तालाब’ की होगी तलाश
दिल्ली में गिरते भूजल स्तर के बीच नगर निगम ने 314 साल पुराने मुगलकालीन किशन दास तालाब को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है। एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार की पहल पर ओखला में केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के पीछे लुप्त हो चुके इस तालाब की तलाश की जाएगी। इसे वर्षा जल संचयन और भूजल रीचार्ज के लिए विकसित करने की तैयारी है। एमसीडी हेरिटेज सेल की रिसर्च के मुताबिक, वर्ष 1712 में मुगल बादशाह जहांदार शाह ने इस तालाब के पास सेना का पड़ाव डाला था। समय के साथ यह जल निकाय गायब हो गया। अब इसकी पहचान के लिए पुराने नक्शों, राजस्व रिकॉर्ड और हवाई तस्वीरों की मदद ली जाएगी। एमसीडी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए दिल्ली जल बोर्ड, डीडीए और सीआरआरआई के साथ सर्वे के आंकड़े साझा करेगी। कमिश्नर संजीव खिरवार के मुताबिक, तालाब के पुनरुद्धार से बारिश का पानी संरक्षित करने और आसपास भूजल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी। अप्रैल 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी राजधानी में लुप्त होते जल निकायों पर चिंता जताई थी। 1712 में जहांदार शाह ने डाला था डेरा ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक, 9 दिसंबर 1712 को जहांदार शाह ने खिजराबाद के पास ‘तालुक किशन दास’ में सेना का पड़ाव डाला था। वर्ष 1739 में नादिर शाह के आक्रमण और 1842 के यात्रा दस्तावेज में भी इस तालाब का उल्लेख मिलता है। 15 मीटर की ढलान से मिले तालाब के सुराग हेरिटेज सेल के सदस्य सचिव डॉ. अकील अहमद के मुताबिक, 1807, 1828 और 1914 के नक्शों में तालाब के संकेत मिले हैं। सीआरआरआई के सामने और ओखला टैंक के बीच करीब 15 मीटर की प्राकृतिक ढलान है। पुराने नक्शों और हवाई तस्वीरों के मिलान के बाद जमीनी सर्वे होगा। तालाब के अवशेष मिलने पर पुनरुद्धार की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
स्रोत: आधिकारिक समाचार माध्यम (https://www.bhaskar.com/local/new-delhi/news/okhla-mcd-revive-kishan-das-talab-mughal-era-water-body-delhi-139466987.html)
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