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सर्जरी के बिना भी जटिल हृदय रोगों का इलाज संभव:नई तकनीकों पर मंथन, आगरा राष्ट्रीय सम्मेलन में जुटे 450 कार्डियोलॉजिस्ट

📅 प्रकाशित: 25 October 2026, 05:10 👁️ 2 बार देखा गया

हृदय रोग के गंभीर मरीजों को अब कई मामलों में ओपन सर्जरी के बिना भी इलाज मिल रहा है। आधुनिक एंजियोप्लास्टी, खराब वाल्व को बदलने और उसकी मरम्मत करने वाली तकनीकों से बुजुर्ग और अधिक जोखिम वाले मरीजों के इलाज के विकल्प बढ़े हैं। इन तकनीकों के साथ मरीज की सुरक्षा, सही चयन और समय पर बीमारी की पहचान पर जोर दिया जा रहा है। शनिवार को होटल जेपी पैलेस में आगरा इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सोसाइटी की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 6.0’ में देशभर से आए विशेषज्ञों ने इन विषयों पर चर्चा की। पहले दिन 450 प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ 20 तकनीकी सत्र हुए। नई दिल्ली से आए डॉ. सुभाष चंद्रा ने बताया कि आधुनिक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी से उन बुजुर्ग और अधिक जोखिम वाले मरीजों में भी जटिल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी की जा रही है, जिन्हें पहले सर्जरी के लिए अनुपयुक्त माना जाता था। टीएवीआर, मित्राक्लिप और ट्राइकसपिड वाल्व इंटरवेंशन जैसी तकनीकों से भी बिना ओपन सर्जरी के वाल्व संबंधी बीमारियों के इलाज के विकल्प बढ़े हैं। हृदय के साथ किडनी का स्वस्थ रहना भी जरूरी डॉ. हिमांशु यादव ने ‘हार्ट फेलियर- किडनी इज द की’ विषय पर कहा कि हृदय और किडनी एक-दूसरे के कामकाज को प्रभावित करते हैं। इनमें से एक अंग के अस्वस्थ होने पर दूसरे पर भी असर पड़ सकता है। आयोजन सचिव डॉ. सुवीर गुप्ता ने कहा कि हृदय को स्वस्थ रखने के लिए तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और शराब से दूरी बनाना, नियमित टहलना और जीवनशैली में सुधार करना जरूरी है। परिवार में हृदय रोग का इतिहास होने पर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। उन्होंने बताया कि डायबिटीज के साथ धूम्रपान करने वाले लोगों में हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। डॉ. वरुण शर्मा ने बताया कि हार्ट फेलियर के लगभग आधे मरीजों में हृदय की पंपिंग क्षमता सामान्य रह सकती है। इसे एचएफपीईएफ (HFpEF) कहा जाता है। ऐसे मरीजों में थकान, सांस फूलना और सूजन जैसे लक्षण होने के बावजूद इको जांच में पंपिंग क्षमता सामान्य आने से बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और एट्रियल फाइब्रिलेशन इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं। दवाओं और इलाज की नई तकनीकों पर चर्चा डॉ. सुमीत सेठी ने बताया कि हार्ट अटैक के बाद दी जाने वाली डुअल एंटीप्लेटलेट थेरेपी में खून के थक्के बनने से बचाव और रक्तस्राव के खतरे के बीच संतुलन जरूरी है। मरीज की स्थिति के अनुसार दवा का चयन करना चाहिए। वहीं डॉ. सुब्रत अखौरी ने कहा कि कम चीर-फाड़ वाली तकनीकों से इलाज के विकल्प बढ़े हैं, लेकिन मरीज की सुरक्षा के लिए सही केस का चयन, सटीक परामर्श और व्यवस्थित उपचार जरूरी है। डॉ. जितेंद्र कुमार ने हृदय और किडनी के मरीजों में पोटैशियम बढ़ने की समस्या पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि किडनी की पुरानी बीमारी और हार्ट फेलियर में इस्तेमाल होने वाली कुछ महत्वपूर्ण दवाओं से पोटैशियम का स्तर बढ़ सकता है। ऐसे में दवाएं बंद करने के बजाय निगरानी और उचित प्रबंधन जरूरी है। उन्होंने पोटैशियम नियंत्रित करने वाली दवा एसजेडसी (SZC) और इससे जुड़े अध्ययन के निष्कर्ष भी साझा किए। डॉ. विवेका कुमार ने बताया कि टीएवीआर तकनीक से एओर्टिक वाल्व की बीमारी का इलाज संभव हुआ है, लेकिन समय के साथ वाल्व खराब होने की आशंका भी रहती है। इसकी पहचान के लिए इको और सीटी स्कैन की मदद ली जाती है। मरीज की स्थिति के अनुसार निगरानी, दवाओं या दोबारा वाल्व संबंधी प्रक्रिया का विकल्प चुना जा सकता है। डॉ. राजगोपाल जे. ने बताया कि हार्ट अटैक के बाद माइट्रल वाल्व में गंभीर खराबी होने पर पहले आपातकालीन ओपन सर्जरी की जरूरत पड़ सकती थी, जबकि अब चुनिंदा मरीजों में मित्राक्लिप जैसी तकनीक से बिना ओपन सर्जरी वाल्व की मरम्मत की जा सकती है। डॉ. गजिन्दर गोयल ने हार्ट फेलियर की नई गाइडलाइंस में बीमारी की रोकथाम, समय पर पहचान और शीघ्र इलाज पर जोर दिया। डॉ. सौरभ नागर ने हार्ट फेलियर के मरीजों के लिए फोर पिलर्स थेरेपी और वेरीसिगुएट दवा की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सही समय पर उपचार से मरीजों की स्थिति में सुधार और अस्पताल में दोबारा भर्ती होने का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। पद्मश्री डॉ. डीएस गंभीर को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड सम्मेलन में प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. दलजीत सिंह गंभीर को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इकोकार्डियोग्राफी के मूल सिद्धांतों पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण भी हुआ। डॉ. तरुण सिंघल के संयोजन में कार्डियोलॉजी विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। पद्मश्री डॉ. डीएस गंभीर, डॉ. उमर हसन, डॉ. अनिल भान, डॉ. शरद पालीवाल, डॉ. कैलाश विश्वानी, डॉ. एसके कालरा और डॉ. ईशान गुप्ता सहित कई विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और शोध साझा किए। इससे पहले पद्मश्री डॉ. डीके हाजरा ने दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का संचालन देवेंद्र ढल ने किया। आयोजन सचिव डॉ. सुवीर गुप्ता ने बताया कि रविवार को होटल हॉलीडे इन, संजय प्लेस में सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक मेडिकल छात्रों के लिए विशेष इकोकार्डियोग्राफी कार्यशाला आयोजित होगी। इसमें हृदय की पंपिंग क्षमता मापने, वाल्व की खराबी पहचानने और जांच रिपोर्ट पढ़ने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।


स्रोत: आधिकारिक समाचार माध्यम (https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/agra/news/agra-cardiology-live-conference-heart-treatment-experts-update-139478859.html)

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