नेतन्याहू हारे तो ये होंगे नए इजरायली प्रधानमंत्री, क्या करेगा भारत?
इजराइल में प्रधानमंत्री चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो गई है। इस बार नेतन्याहू के बजाय पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़ेनकोट प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार बनते दिख रहे हैं। छह में से चार ओपिनियन पोल में आइज़ेनकोट के गठबंधन को ज्यादा सीटें दी गई हैं। जबकि नेतन्याहू के गठबंधन को एक पोल में बढ़त तो दूसरे पोल में बहुमत मिला है। इस चुनाव के फाइनल नतीजे 4 नवंबर को आएंगे। इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत है। वैसे ओपिनियन पोल्स कुछ भी कहे लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि नेतन्याहू को कम समझने की गलती इतनी जल्दी नहीं करनी चाहिए। लेकिन एक बार मान लीजिए कि नेतन्याहू चुनाव हार गए और गादी आइज़ेनकोट नए इजराइली प्रधानमंत्री बन गए तो इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा? भारत के बारे में गादी आइज़ेनकोट का क्या कहना है? ईरान और गाज़ा पर आइजनक कोर्ट किस तरह का एक्शन ले सकते हैं?
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41 साल इजराइली सेना में रहे आइजन कोर्ट गाज़ा जंग में अपने बेटे और दो भतीजों को खो चुके हैं। आइज़ेनकोट इजरायली आर्मी चीफ के पद से रिटायर हुए तो उन्होंने राजनीति में कदम रख दिया। आइज़ेनकोट ने एक साल पहले ही याशार नाम की एक पार्टी बनाई और अब वह 19 साल तक इजराइल के प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू को सीधी टक्कर दे रहे हैं। आपको बता दें कि इजराइल का प्रधानमंत्री कोई भी बने उनका फोकस एक ही होता है। इजराइल के आम लोग हो, स्थानीय नेता हो या प्रधानमंत्री पद का दावेदार उन सभी के लिए दुश्मन सिर्फ दुश्मन ही होता है। दुश्मन से बातचीत नहीं की जाती, दुश्मन का सफाया किया जाता है। इजराइल ही वह देश है जहां के लोगों को सही मायने में शत्रु बोध की परिभाषा आती है। यह सभी के सभी अपने देश के प्रति वफादार होते हैं। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि भारत में भी ऐसा ही होना चाहिए। भारत में आज भी वामपंथी और कट्टरपंथी पाकिस्तान और चीन को अपना पहला प्यार मानते हैं। यह लोग अपने ही देश भारत को गाली देने से कभी नहीं चूकते। भारत में ऐसे कई नेता हैं जो आज भी पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं। लेकिन इसराइल में ऐसी दिक्कत नहीं है। जब देश की बात आती है तो पक्ष और विपक्ष दोनों एक साथ मिलकर देश के लिए काम करते हैं। यही सोच नेतन्याहू की रही है और यही सोच अब गादी आइज़ेनकोट की भी है।
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आइज़ेनकोट ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री बनने के 18 महीनों के भीतर मैं गाज़ा से हमेशा के लिए हमास का नामोनिशान मिटा दूंगा। यानी इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू रहे या आइज़ेनकोट हमास को घसीट घसीट कर मारा जाएगा। आपको बता दें कि अगर गादी आइज़ेनकोट इजराइल के प्रधानमंत्री बन जाते हैं तो इससे भारत और इजराइल के द्विपक्षीय संबंधों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। आइज़ेनकोट भारत के लिए अच्छे साबित हो सकते हैं। इजराइल में चाहे दक्षिणपंथी जीते, मध्यम मार्गी जीतें या वामपंथी दल सभी भारत को एशिया में अपना सबसे भरोसेमंद रणतिक साझेदार मानते हैं। हालांकि नेतन्याहू के मुकाबले आइजन कोर्ट की कार्यशैली कम आक्रामक मानी जाती है। हो सकता है कि पीएम मोदी और बेंजमिन नेतन्याहू के बीच जैसी व्यक्तिगत और सार्वजनिक केमिस्ट्री दिखाई देती थी। वो आइज़ेनकोट के साथ शुरुआती दौर में ना दिखे लेकिन पर्दे के पीछे होने वाली सरकारी खुफिया और व्यापारिक समझौते पूरी तरह से मजबूत बने रहेंगे। जहां तक नेतन्याहू ईरान के शासन को पूरी तरह से खत्म करने का दावा कर रहे हैं, वहीं गादी आइज़ेनकोट चाहते हैं कि मेरा उद्देश्य सिर्फ ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को पूरी तरह नष्ट करना है।
स्रोत: आधिकारिक समाचार माध्यम (https://www.prabhasakshi.com/international/israel-votes-for-prime-minister-as-gadi-eisenkot-challenges-benjamin-netanyahu)
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