📅 Monday, 26 October 2026 | ऑल इंडिया संपादक परिषद
LIVE NEWS AISP राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल लाइव | डिजिटल QR आईडी कार्ड सेवा सक्रिय | बौद्धिक मंच व विचार प्रवाह चालू...
Piyush Dwivedi
पीयूष द्विवेदी राष्ट्रीय अध्यक्ष मान्यता प्राप्त पत्रकार,
उ0 प्र0 शासन
AISP Crest Logo

AISP.CLUB

All India Sampadak Parishad

Abhinay Seth
अभिनय सेठ (गुरुभाई) राष्ट्रीय प्रमुख (डिजिटल मीडिया)
🏠 होम 🏛️ PIB विज्ञप्ति 🔍 फैक्ट-चेक 🇮🇳 राष्ट्रीय 🌐 अंतरराष्ट्रीय 🗺️ राज्य समाचार 📍 जिला एवं शहर 💳 सदस्यता 🔍 सत्यापन
🏠 होम » राष्ट्रीय

2027-28 तक तैयार होगी ब्रह्मोस-नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल:चीफ बोले- वजन 1.3 टन होगा; रेंज बढ़ाकर 1500km करना रोडमैप में शामिल, इसकी शुरुआती रेंज 290km थी

📅 प्रकाशित: 23 October 2026, 04:06 👁️ 4 बार देखा गया

ब्रह्मोस एयरोस्पेस 2027-2028 तक ब्रह्मोस-नेक्स्ट जेनरेशन (NG) पहला प्रोटोटाइप तैयार कर सकता है। ब्रह्मोस-NG यानी मिसाइल का छोटा और हल्का रूप है। अभी वाली ब्रह्मोस 3 टन की है, इसलिए एक सुखोई-30 पर 1 ही मिसाइल लगती है। नई ब्रह्मोस-NG (नेक्स्ट जेनरेशन) सिर्फ 1.3 टन का होगा। सुखोई पर 3 मिसाइल लगेंगी। तेजस, राफेल जैसे छोटे फाइटर जेट पर भी लग सकेगी। यानी इसकी ज्यादा स्वदेशी, नई टेक्नोलॉजी और हल्के मटेरियल से बनेगी। कंपनी के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. जयतीर्थ जोशी ने ANI को दिए इंटरव्यू में बताया कि मिसाइल अपनी शुरुआती 290 किमी स्ट्राइक रेंज से आगे की क्षमता दिखा चुकी है। अब कंपनी 1500 KM रेंज वाली मिसाइल का सोच रही है, लेकिन वो अभी सिर्फ कागज पर है। इसके लिए रूस से बात चल रही है। विदेशी सेनाएं ब्रह्मोस-NG भी रुचि दिखा रहीं डॉ. जोशी ने बताया कि कुछ देशों ने लड़ाकू विमान से लॉन्च की जा सकने वाली बह्मोस को अपनी एयरफोर्स में शामिल करने में रुचि दिखाई है। इन देशों के पास सुखोई-30 विमान मौजूद हैं। इसके अलावा, कुछ देशों ने ब्रह्मोस-एनजी की इच्छा भी जताई है, जिसे पहले एयरबोर्न कॉन्फिगरेशन में विकसित किया जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर में प्रदर्शन के बाद बढ़ी दिलचस्पी डॉ. जोशी के मुताबिक, मिसाइल के ऑपरेशन सिंदूर में प्रदर्शन के बाद विदेशी सेनाओं की इसके ऑपरेशनल और फंक्शनल पैरामीटर्स में दिलचस्पी बढ़ी है। सेनाएं ऐसा अत्याधुनिक सिस्टम चाहती हैं, जो तेजी से बदलते युद्ध के माहौल के अनुसार खुद को ढाल सके। डॉ. जोशी ने कहा कि ब्रह्मोस एक बेहद आधुनिक हथियार है। यह समय के साथ विकसित हो रहा है और इसने अपने प्रदर्शन की क्षमता साबित की है। पूरे ऑपरेशन के दौरान मिसाइल ने दुश्मन के ठिकानों पर सटीक निशाना लगाया। इस दौरान एक भी मिसाइल इंटरसेप्ट नहीं हुई। भारत के रक्षा निर्यात में ब्रह्मोस की भूमिका डॉ. जोशी ने कहा कि मिसाइल के युद्ध प्रदर्शन का भारत के रक्षा निर्यात पर असर पड़ा है। उनके मुताबिक, ब्रह्मोस भारत की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है। उन्होंने कहा, “ब्रह्मोस अब सिर्फ एक मिसाइल नहीं है। यह आत्मविश्वास से भरे और आत्मनिर्भर नए भारत की ताकत, सटीकता और गर्व है। सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेस, नूर खान समेत कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया। इससे इस हथियार प्रणाली की ताकत सामने आई। ब्रह्मोस सिस्टम भारत के रक्षा निर्यात का भी अहम आधार है। भारत का रक्षा निर्यात 38,400 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। इसमें सालाना 62.7% की बढोतरी दर्ज की गई है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… सेना 800km रेंज वाली ब्रह्मोस क्रूज-मिसाइल खरीदेगी:अभी 450km तक निशाना साधने वाली मिसाइल मौजूद, ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुआ था भारतीय सेना 800 किमी से ज्यादा रेंज वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने की तैयारी में है। फिलहाल सेना के पास 450 किमी तक मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल मौजूद है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, रक्षा अधिकारियों ने बताया कि सेना इस नए वर्जन का बड़ा ऑर्डर देने की योजना बना रही है। पूरी खबर पढ़ें…


स्रोत: आधिकारिक समाचार माध्यम (https://www.bhaskar.com/g/national/news/brahmos-missile-range-roadmap-jayteerth-joshi-statement-update-139454369.html)

← मुख्य पृष्ठ पर लौटें AISP Official Digital Desk

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 All India Sampadak Parishad (AISP). सर्वाधिकार सुरक्षित।
Powered by Digital Nation Inn (DNI) | Managed by AISP Digital Wing